सफलता उन्ही को मिलती है जो सफलता के पीछे लगे रहते है. जिनको भी सफलता पानी हो उनको बस एक काम करना होता है. वो बस अपना काम समय पर करते रहे. पिछले संस्करण में हितेश दोशी की सफलता की कहानी आपने देखि थी. आज हम युसरा फातिमा ने कम उम्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की बाते जानेंगे.
युसरा फातिमा ने मात्र 15 वर्ष की उम्र में सबसे ज्यादा कविता और किताबें लिखने का वर्ल्ड रिकॉर्ड बना डाला है. इस कृत्य के कारण अब उनकी ख्याति दूर दूर तक फैलने लगी है. अब उनका नाम अब गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज हो गया है.
आपको बता दें की जैसे ही यह खबर उन्होंने सुनी उनके स्कूल और घर में खुशी का माहौल है.
कौन हैं युसरा फातिमा
सबसे पहले ये जान लीजिये की युसरा फातिमा Bihar के गोपालगंज जिले की रहने वाली हैं. वह RM Public School की 12वीं कक्षा की छात्रा हैं. उनको बचपन से ही लिखने का बड़ा शौख था. वो अक्सर अपने खाली समय में कविता लिखती रहती थी. युसरा ने बहुत छोटी उम्र से ही लिखना शुरू कर दिया था.
आपको बता दें की उनकी पहली किताब “जज्बा” तब प्रकाशित हुई थी जब उनकी उम्र सिर्फ 11 साल 9 महीने थी. मात्र 11 वर्ष की उम्र में किसी किताब को पब्लिश कर देना किसी कमाल कार्य से कम नहीं था.
उनकी लेखनी में समाज के कमजोर और वंचित वर्ग की आवाज झलकती है. युसरा चाहती हैं कि उनकी कविताएं उन लोगों की आवाज बनें जिन्हें कोई नहीं सुनता. उनके कविता में अक्सर दबे कुचले लोगो की आवाज छुपी होती है. वह समाज के वंचित और गरीब लोगों के लिए लिखती हैं.
उनकी कविताओं में दर्द भी है और उम्मीद भी. युसरा का कहना है कि कविता समाज को बदलने का एक सशक्त माध्यम है. वह आगे भी लिखती रहना चाहती हैं ताकि दुनिया भर के लोग उनकी कविताओं से प्रेरणा ले सकें.
जब युसरा के स्कूल में इस उपलब्धि के बारे में पता चली तो उनके स्कूल में सभी अध्यापक और प्रधानाध्यापक में ख़ुशी के लहर दौड़ पड़ी. इस बड़ी उपलब्धि से उनके स्कूल में उत्सव जैसा माहौल बन गया था. सिर्फ इतना ही नहीं बल्कि RM Public School के शिक्षकों ने युसरा को सम्मानित किया है.
आगे की योजना
युसरा अब और भी बड़ी किताबें लिखने की योजना बना रही हैं. वह चाहती हैं कि उनकी कविताएं देश और दुनिया में पढ़ी जाएं. युसरा साहित्य के क्षेत्र में बड़ा नाम बनाना चाहती हैं. उन्होंने कहा कि वह कमजोर आवाजों को और भी बुलंद करना चाहती हैं.