अक्सर सभी पिता की यह इच्छा होती है की उनके बेटे पढ़ लिख कर एक अच्छे मुकाम पर पहुच जाए. पिता की कामना और आशीर्वाद ही बच्चो को आगे बढ़ने में प्रेरणा देती है. त्रिपुरारी कुमार की भी कहानी कुछ ऐसी ही है. उनके पिता ने कहा था की देश सेवा सर्वो पारी है.
उन्होंने त्रिपुरारी को अच्छी शिक्षा दी थी. इसलिए उन्होंने अपने जीवन में जो किया वह मिसाल से कम नहीं है. उनके पिता का सपना था कि बेटा पुलिस की खाकी वर्दी पहने और देश की सेवा करे. त्रिपुरारी ने बिलकुल ऐसा ही किया.
त्रिपुरारी कुमार ने अपने पिता से वादा किया था कि वह इस सपने को पूरा करेगा. आज त्रिपुरारी कुमार ने अपने फर्ज को निभाया है. उनकी सफलता की कहानी आज हर किसी को प्रेरणा देती है.
कठिन परिस्थितियों में शुरू किया सफर
त्रिपुरारी कुमार एक सामान्य घर परिवार से आते है. जब वे पढ़ते थे उनका परिवार अक्सर आर्थिक तंगी से जूझता रहता था. पिता अक्सर बेटे को अच्छे से पढाई को प्रेरित करते. लेकिन उनका काम याब होने का सफर आसान नहीं था.
पहले वो घर पर से सरकारी नौकरी की तैयरी करते थे . लेकिन कोई रिजल्ट हाथ नहीं लग रहा था. उन्होंने अपने सपने को पूरा करने के लिए पटना का रुख किया. उस समय उनके पास सिर्फ 500 रुपये थे.
शहर में 500 रुपया कितनी कम रकम होती है ये तो आपको भी पता होगा. फिर भी जैसे तैसे इन्हीं पैसों से उन्होंने सरकारी नौकरी की तैयारी शुरू की.
उनको पढाई में तो मन लग रहा था लेकिन खाने पिने केलिए पैसे भी तो चाहिए था. तो उन्होंने रोजमर्रा के खर्चों को पूरा करने के लिए उन्होंने अखबार बेचना शुरू किया. वह 50 रुपये में अखबार खरीदते थे और उन्हें बेचकर पढ़ाई का खर्च निकालते थे.
पहली असफलता भी नहीं तोड़ सकी हिम्मत
जैसे तैसे जीवन चल रहा था. त्रिपुरारी कुमार ने दरोगा भर्ती की परीक्षा दी थी. दुर्भाग्य वश पहले प्रयास में वह सफल नहीं हो सके. लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। वह फिर से मेहनत में जुट गए.
दिन रात पढ़ाई करते रहे. आखिरकार 2017 में उनकी मेहनत रंग लाई. उन्होंने दरोगा भर्ती परीक्षा पास कर ली. उनकी ज्वॉइनिंग 1 नवंबर 2017 को हुई.
यह दिन उनके और उनके परिवार के लिए बेहद खास था. पिता का सपना पूरा हुआ और बेटे ने अपना वादा निभाया।