अक्सर ऐसा देखा जाता है की किसी किसी छात्र का कोई खास विषय कमजोर होता है. ऐसे ही एक मेधावी शख्स की कहानी आज हम लेकर आये है. इनका नाम अनुराग आर्य है. बचपन से अनुराग आर्य को देश सेवा में रूचि थी. वो हमेशा से सोचते की “मै एक दिन बड़ा होकर IPS बनूँगा”. उन्होंने काफी गहराई से सपना देखा था. कड़ी मेहनत की और उन्होंने अपना सपना को पूरा भी किया था.
IPS अनुराग आर्य उत्तर प्रदेश के Baghpat जिले के Chhaprauli गांव के रहने वाले है. बचपन में वो भी बहुत खेलते थे. उनका बचपन आम ग्रामीण बच्चों जैसा ही था. उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई गांव के एक साधारण स्कूल से की थी.
उनके माता-पिता डॉक्टर हैं. लेकिन अनुराग का पढ़ाई में मन शुरू से बहुत अच्छा नहीं था. खासकर उन्हें अंग्रेजी से बहुत डर लगता था. वह अंग्रेजी बोलने में हिचकिचाते थे. लेकिन वो हमेशा चाहते थे की अंग्रेजी उनका अच्छा हो. तो वो काफी मेहनत भी करते थे.
मिलिट्री स्कूल से मिला अनुशासन
आपको बता दें की साल 2008 में उन्होंने Dehradun के Indian Military School में दाखिला लिया. वहां उन्हें अनुशासन और मेहनत की अहमियत समझ आई. यह बात तो सब जानते है की जिस व्यक्ति के अन्दर अनुशासन आ गया वो कुछ भी कर सकता हहै. अनुशासन सभी सफलता का कुंजी है. मिलिट्री स्कूल में उन्होंने धीरे-धीरे खुद को बदला.
लेकिन अंग्रेजी उनका कमजोर पक्ष बना रहा. इसके बाद उन्होंने Delhi के Hindu College में MSc की पढ़ाई शुरू की. लेकिन यहां भी उन्हें कठिनाई का सामना करना पड़ा.
वह दो विषयों में फेल हो गए. यह उनके जीवन का बड़ा झटका था. कई लोग टूट जाते हैं लेकिन अनुराग ने हार नहीं मानी. उन्होंने खुद को फिर से खड़ा किया. खुद पर विश्वाश करने वालों को मंजिल मिल ही जाती है. ऐसे ही त्रिपुरारी कुमार जो दरोगा बने थे उनके साथ हुआ था. वो कभी अख़बार बेचा करते थे. लेकिन उनको भी सफलता आख़िरकार मिल ही गई थी.
फेल हुए लेकिन हार नहीं मानी
कॉलेज में फेल होने के बाद उन्होंने बड़ा फैसला लिया. दरअसल उनको बचपन से ही अधिकारी बनने का सपना था. उन्होंने तय किया कि अब वह UPSC की तैयारी करेंगे. वह IPS बनना चाहते थे. वह जानते थे कि यह रास्ता आसान नहीं है. लेकिन उन्होंने तैयारी शुरू कर दी. उन्होंने अपनी अंग्रेजी सुधारने पर खास ध्यान दिया. दिन रात पढ़ाई करना शुरू कर दिया.
पहले ही प्रयास में बन गए IPS
दिन रात की पढाई आखिरकार रंग लाई. साल 2013 में उन्होंने UPSC परीक्षा दी. यह उनका पहला प्रयास था. उन्होंने इस परीक्षा में 163वीं रैंक हासिल की. वह IPS बन गए.