Overview:

: 14 साल में हुई शादी

: पति ने छोड़ा फिर भी नहीं मानी हार

: अब बाल विवाह के खिलाफ मुहिम चला रहीं

आज की कहानी से हम ये जानेंगे की जिंदगी में अगर सभी दरवाजे बंद भी हो जाये तो भी कुछ न कुछ रास्ता निकल ही आता है. रौशनी परवीन के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ था. कम उम्र में शादी और फिर ससुराल में दिक्कतों का सामना. किसी तरह परवीन में हिम्मत नहीं हारी और कुछ को संभाला.

Bihar के Kishanganj जिले की एक साहसी महिला उनका नाम है Roshni Parveen. वह Simlabari गांव की रहने वाली हैं. उनका जीवन बहुत ही कठिनाइयों से भरा रहा. फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी. सभी कठिनाई का अकेले सामना करते हुए आज वो अच्छे मुकाम पर पहुच चुकी है.

अंग्रेजी से डरते थे लेकिन IPS बनने का सपना नहीं छोड़ा

सबसे पहले आपको बता दें की Roshni की शादी बहुत ही कम उम्र में कर दी गई थी. जब वह सिर्फ 14 साल की थीं तब उनकी शादी 45 साल के एक व्यक्ति से कर दी गई. यह उनके लिए एक दुखद मोड़ था.

शादी के कुछ ही समय बाद Roshni को बहुत कष्ट सहने पड़े. पति का व्यवहार अच्छा नहीं था. वह अक्सर उन्हें प्रताड़ित करता था. Roshni ने कई बार चुपचाप सहन किया. फिर एक दिन वह अपने मायके लौट आईं.

कुछ महीनों बाद Roshni को पता चला कि वह गर्भवती हैं. उन्होंने एक बेटे को जन्म दिया . जब पति को यह बात बताई गई तो उसने बच्चे और Roshni दोनों को अपनाने से मना कर दिया. यह Roshni के जीवन के लिए सबसे बड़ी टर्निंग पॉइंट थी. उन्होंने ठान लिया था की अब अकेले ही जीवन यापन करुँगी.

रौशनी खुद के पैरों पर खड़ी हुईं

पति के ठुकराने के बाद Roshni ने खुद को मजबूत किया. उन्होंने खुद ही अपने बेटे की परवरिश शुरू की. पहले उन्होंने छोटे-मोटे काम किए. सिलाई का काम सीखा. लोगों के घरों में काम किया.

बाल विवाह के खिलाफ चलाया अभियान

Roshni ने अपने अनुभव को ताकत बनाया. उन्होंने बाल विवाह के खिलाफ लड़ाई शुरू की. उन्होंने गांव-गांव जाकर लोगों को समझाना शुरू किया. जल्द ही वह Childline India Foundation से जुड़ गईं.